Monday, 26 August 2019

Diabetes Treatment and Types डायबिटीज के प्रकार और इलाज

डायबिटीज इलाज


डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जो शरीर में ब्लड ग्लूकोस को अनियंत्रित कर देती है, जिसे ब्लड शुगर भी कहा जाता है

 अगर इसका इलाज सही तरह से या सही समय पर किया जाए तो रक्त में शुगर का स्तर और अधिक बढ़ सकता है  जिसकी वजह से कई खतरनाक जटिलताएं देखने को मिल सकती हैं जैसे स्ट्रोक और दिल की बीमारी.
आपको अलग-अलग प्रकार की डायबिटीज हो सकती हैं, और उसके प्रकार पर इलाज निर्भर करता है. अत्यधिक वजन वाले लोग या सुस्त जीवनशैली जीने वाले लोगों को सभी प्रकार की डायबिटीज नहीं होती. बल्कि कुछ शुगर के प्रकार बचपन से ही देखने को मिल जाते हैं.

डायबिटीज के प्रकार

डायबिटीज के तीन बड़े प्रकार हैं -
  1. टाइप 1
  2. टाइप 2
  3. गेस्टेशनल डायबिटीज

टाइप 1 डायबिटीज 

इसे जुवेनाइल डायबिटीज भी कहते हैं, यह टाइप तब होता है जब शरीर इन्सुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता. जो लोग टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित होते हैं वो लोग इलाज के लिए रोजाना आर्टिफिशियल इन्सुलिन लेते हैं.

टाइप 2 डायबिटीज 

टाइप 2 डायबिटीज शरीर के इंसुलिन के उपयोग के तरीके को प्रभावित करता है. जबकि शरीर आपका तब भी इन्सुलिन का  उत्पादन करता है, इसके विपरीत अगर टाइप 1 में देखा जाए तो, शरीर में कोशिकाएं पहले की तरह सही तरह से कार्य नहीं कर पाती. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ डायबिटीज और किडनी डिसीज के अनुसार यह डायबिटीज का आम प्रकार है, और यह मोटापे के बढ़ने का भी कारण बनता है.

गेस्टेशनल डायबिटीज 

यह टाइप महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान देखा जाता है, जब शरीर इन्सुलिन के प्रति संवेदनशील हो जाता है. जरूरी नहीं है गेस्टेशनल डायबिटीज हर महिलाओं में देखा जाए और बच्चे के जन्म के बाद ठीक हो जाए.

प्री-डायबिटीज

डॉक्टर कुछ लोगों को प्रीडायबिटीज या बॉर्डर लाइन डायबिटीज होने के बारे में तब बताते हैं जब ब्लड शुगर आमतौर पर 100 से 125 मिलीग्राम प्रति डेसीलिटर होता है. सामान्य ब्लड शुगर का स्तर 70 और 99 मिलीग्राम डेसीलिटर होता है, जबकि डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति को 126 मिलीग्राम डेसीलिटर से अधिक मात्रा में ब्लड शुगर होता है. प्रीडायबिटीज स्तर का मतलब है कि ब्लड ग्लूकोज सामान्य से अधिक होना.

प्रीडायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम कारक समान हैं. जैसे

  • अत्यधिक वजन होना
  • परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज होना 
  •  परिवार में पहले से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होना  
  • गेस्टेशनल डायबिटीज होना या ऐसे बच्चे को जन्म देना जिसका वजन 4 किलो से ज्यादा हो  
  • सुस्त जीवनशैली होना
  •   45 साल से ज्यादा उम्र होना, आदि.
         

इन्सुलिन कैसे बढ़ता है

देखा जाये तो टाइप 1 डायबिटीज का सही कारण भी डॉक्टर को नहीं पता. टाइप 2 डायबिटीज को इन्सुलिन रेसिस्टेंस भी कहा जाता है. इंसुलिन एक व्यक्ति के भोजन से ग्लूकोज को ऊर्जा की आपूर्ति करने के लिए उनके शरीर में कोशिकाओं तक पहुंचने में मदद करता है. इन्सुलिन रेसिस्टेंस आमतौर पे नीचे दी गयी बातों का भी परिणाम हो सकता है
  1.   व्यक्ति के जींस या वातावरण के कारण पर्याप्त इंसुलिन बनाने में असमर्थ रहता है. जिसकी वजह से वो समझ नहीं पाता कि ग्लूकोस को नियंत्रित कैसे किया जाए
  2.  ब्लड ग्लूकोस की प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए शरीर अत्यधिक इन्सुलिन बनाने लगता है। 
  3.   शरीर में पैंक्रियास बढ़ते ग्लूकोस को नियंत्रित नहीं कर पाते और अत्यधिक ब्लड शुगर को रक्त में सर्कुलेट करने लगते है, जिसकी वजह से डायबिटीज की समस्या होने लगती है
  4. समय के चलते, इन्सुलिन इतना प्रभावी नहीं रहता और ब्लड शुगर का स्तर लगातार बढ़ता रहता है.

व्यायाम और डाइट टिप्स

अगर डॉक्टर को पता चलता है कि व्यक्ति को टाइप 2 डायबिटीज है, तो वो जीवनशैली में बदलाव करने की सलाह देगा जिससे आपका वजन कम हो और स्वास्थ्य भी बेहतर रहे. डॉक्टर डायबिटीज या प्रीडायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति को न्यूट्रिशनिस्ट के पास जाने की सलाह दे सकता है. स्पेश्लिष्ट डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति की चुस्त, संतुलित जीवनशैली और स्थिति को नियंत्रित करने करने में मदद करेगा.

डायबिटीज से पीड़ित जीवनशैली में सुधार नीचे दिए गए तरीकों से कर सकते हैं जैसे -

1.  अधिक मात्रा में ताजे और पौष्टिक फलों का सेवन करें जैसे साबुत अनाज, फल, सब्जियां, लीन प्रोटीन, लो फैट डेयरी, और स्वस्थ फैट से बने आहार जैसे नट्स.
2.  अधिक मात्रा में चीनी से बने उत्पादों को खाएं या फिर जिनमें कैलोरी अधिक मात्रा में हो, या ऐसी कैलोरी जिनसे  के पोषण से जुड़े फायदे नहीं मिलते हैं जैसे मीठा सोडा, तला खाना और मिठाई जिनमें बेहद शुगर मौजूद होता है.
 

3.  अत्यधिक शराब के सेवन से जितना हो उतना बचें या फिर अगर आप पीना चाहते हैं तो महिलाओं को एक दिन में एक ड्रिंक और पुरुषों को दिन में दो ड्रिंक पीनी चाहिए.
4.  डायबिटीज की परेशानी को कम करने के लिए कम से कम हफ्ते में पांच दिन आधे घंटे व्यायाम जरूर करें जैसे चलना, एरोबिक्स, बाइक चलाना, या स्विमिंग करना
5.  जब आप व्यायाम करेंगे तो ब्लड शुगर के लक्षण देखने को मिलेंगे जैसे चक्कर आना, थकान महसूस आना, पसीना आना आदि.
         
6.  डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति बॉडी मॉस इंडेक्स को भी कम कर सकते हैं, इस तरह आप बिना दवाई खाएं इस समस्या को कम कर सकते हैं. धीरे-धीरे वेट लॉस करने से आप लम्बे समय तक के लिए फायदे में रह सकते हैं

    

टाइप 2 डायबीटीज में, इन्सुलिन रेसिस्टेंस धीरे-धीरे जब बढ़ने लगता है तो इसके चलते डॉक्टर आपकी जीवनशैली में बदलाव करने की सलाह देते हैं.

इन्सुलिन का इस्तेमाल

टाइप 1 से पीड़ित व्यक्ति को ठीक रहने के लिए इन्सुलिन की आवश्यकता पड़ती है. टाइप 2 और गेस्टशन डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति को भी इन्सुलिन लेने की जरूरत होती है. लेकिन इस बात का ध्यान रखें इन्सुलिन को आप खाने वाली दवा की तरह नहीं ले सकते. इन्सुलिन को पतली सूई की मदद से इंजेक्शन की तरह लिया जाता है.



 ब्रेकिंग न्यूज़ और सत्य के लिए बायीं तरफ नीचे Follow बटन पर क्लिक करके साइट को फॉलो करें

No comments:

Post a Comment

Cancer Treatment कैंसर

What is Cancer? Cancer Treatment कैंसर क्या है आपका शरीर अनेक प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है . जिस तरह से शरीर को जरू...